जन जन का विकास

प्रगति और विकास के लिए महंगाई आवश्यक एवं लाभप्रद है मंहगाई के कारण से ही आज आमजन की क्रय शक्ति बढ़ी है, जो वस्तुए दुर्लभ थी सहज सुलभ है मंहगाई अवरोध है कष्टदायी है इस मिथ्या भ्रम की स्थिति को समाप्त करे। मंहगाई के कारण ही हम प्रगति और विकास की ओर अग्रसर हो रहे है कृपया इसके समर्थन में अपने विचार बतायें एवं अपनी फोटो परिचय के साथ भेजें।

Friday, 24 April 2015

दूसरों के लिए कुछ करते समय कैसी होनी चाहिए भावनाएं?

फारस देश का बादशाह नौशेरवां न्यायप्रियता के लिए विख्यात था। एक दिन वह अपने मंत्रियों के साथ भ्रमण पर निकला। उसने देखा कि एक बगीचे में एक बुजुर्ग माली अखरोट का पौधा लगा रहा है। बादशाह माली के पास गया और पूछा, ‘‘तुम यहां नौकर हो या यह तुम्हारा बगीचा है?’’ 
तब उस माली ने कहा, ‘‘मैं यहां नौकरी नहीं करता। यह बगीचा मेरे ही पूर्वजों ने लगाया है।’’
बादशाह बोले, ‘‘तो तुम यहां अखरोट के पेड़ क्यों लगा रहे हो। क्या तुम समझते हो कि इनके फल खाने के लिए तुम जीवित रहोगे? जगजाहिर है कि अखरोट का पेड़ लगाने के 20 वर्ष बाद फलता है।’’
बुजुर्ग ने बादशाह को उत्तर दिया, ‘‘मैं अब तक दूसरों के लिए लगाए पेड़ों से बहुत फल खा चुका हूं इसलिए मुझे भी दूसरों के लिए पेड़ लगाने चाहिएं। स्वयं फल खाने की आशा से ही पेड़ लगाना तो स्वार्थपरता है।’’ 
बादशाह उस बुजुर्ग माली का जवाब सुन कर बेहद प्रसन्न हुआ और उसे 2 अशर्फियां बतौर पुरस्कार भेंट कीं।
उपकार हमेशा दूसरों के लिए ही किया जाता है। जिस तरह पेड़ दूसरों के लिए फल देते हैं, स्वयं नहीं खाते उसी तरह हमें भी दूसरों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

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