जन जन का विकास

प्रगति और विकास के लिए महंगाई आवश्यक एवं लाभप्रद है मंहगाई के कारण से ही आज आमजन की क्रय शक्ति बढ़ी है, जो वस्तुए दुर्लभ थी सहज सुलभ है मंहगाई अवरोध है कष्टदायी है इस मिथ्या भ्रम की स्थिति को समाप्त करे। मंहगाई के कारण ही हम प्रगति और विकास की ओर अग्रसर हो रहे है कृपया इसके समर्थन में अपने विचार बतायें एवं अपनी फोटो परिचय के साथ भेजें।

Friday, 24 April 2015

अपने और अपनों के बदलते रूप

 * रिश्तों में मिठास पहले होती थी, वह अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
 
* बड़े बुजुर्गों की शर्म- लिहाज होती थी, वह अब नहीं है। सब अपनी मर्जी के मालिक हैं।
 
* पहले घर में अतिथि आता था तो घर में कई तरह के पकवान बनते थे, अब नूडल, मंचूरियन, बर्गर बाजार से आते हैं।
 
* पाठ-पूजा के लिए किसी के पास टाइम नहीं है। पहले मंदिर में घंटी की आवाज आती थी आज मोबाइल की घंटी बजती है।
 
* बच्चे अब अपने माता-पिता से भी छल करने लगे हैं। घर से स्कूल-कालेज जाते हैं पहुंच जाते हैं पार्क में।
 
* पहले घर में कोई समागम होता था सब इकट्ठे बैठ कर एक-दूसरे से राय-मशविरा करते थे। अब सब अपनी मर्जी के मालिक हैं।

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