* रिश्तों में मिठास पहले होती थी, वह अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
* बड़े बुजुर्गों की शर्म- लिहाज होती थी, वह अब नहीं है। सब अपनी मर्जी के मालिक हैं।
* पहले घर में अतिथि आता था तो घर में कई तरह के पकवान बनते थे, अब नूडल, मंचूरियन, बर्गर बाजार से आते हैं।
* पाठ-पूजा के लिए किसी के पास टाइम नहीं है। पहले मंदिर में घंटी की आवाज आती थी आज मोबाइल की घंटी बजती है।
* बच्चे अब अपने माता-पिता से भी छल करने लगे हैं। घर से स्कूल-कालेज जाते हैं पहुंच जाते हैं पार्क में।
* पहले घर में कोई समागम होता था सब इकट्ठे बैठ कर एक-दूसरे से राय-मशविरा करते थे। अब सब अपनी मर्जी के मालिक हैं।
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