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Wednesday, 29 April 2015

क्‍या भारी बस्तों से बच्‍चों की पीठ पर पड़ रहा है बुरा असर?

आजकल बच्‍चों के स्‍कूल के बैग बहुत भारी हो गये हैं। क्‍या इन भारी बैग्‍स का असर उनकी पीठ पर पड़ रहा है?



आजकल कम उम्र में ही पीठ दर्द की समस्यायें सामने रही हैं। और भारी स्कूली बैग इसकी एक बड़ी वजह हो सकते हैं। भारी बस्ते उठाने से बच्चे की लोअर बैक अधिक झुकी अथवा टेढ़ी हो सकती है। इसके अलावा बैग के वजन से सामंजस् बैठाने के लिए वह आगे की ओर झुककर चलने लगता है जिससे उसकी कुदरती पोश्चर में बदलाव जाता है। इस पोश्चर में चलने से उसकी गर्दन् और पीठ की मांसपेशियों में काफी दबाव पड़ता है। इससे थकान और चोट का खतरा भी बढ़ जाता है।

भारी स्कूली बस्तों से मिडिल और लोअर बैक के कुदरती कर्व पर भी असर पड़ता है जिससे रीढ़ की हड़डी के जोड़ों और पंजरों में जलन हो सकती है। भारी बोझ के असर को कम करने के लिए बच्चा कंधा झुकाकर चलने लगता है। कंधों, गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से पर बहुत अधिक दबाव पड़ने से छाती में भी संकुचन होता है, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

बैग को एक कंधे पर टांगकर चलना बच्चों को स्टाइलिश नजर आता है। लेकिन इससे बच्चा एक ओर झुककर चलने लगता है। क्योंकि सारा वजन शरीर के एक ही हिस्से पर पड़ने लगता है। जिस ओर बच्चे ने बैग टांगा होता है उसके विपरीत ओर की लोअर बैक, पसलियां और मिडिल बैक की मांसपेशियों पर काफी तनाव आने लगता है। एक ही कंधे पर बैग टांगकर चलन से अपर बैक में दर्द भी हो सकता है। और साथ ही कंधों और गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव आने लगता है। गर्दन की मांसपेशियो पर बहुत अधिक दबाव पड़ने से जबड़े और सिर में दर्द हो सकता है। और आजकल स्कूल जाने वाले बच्चों में यह समस्या काफी आम हो गई है
आजकल कम उम्र में ही पीठ दर्द की समस्यायें सामने रही हैं। और भारी स्कूली बैग इसकी एक बड़ी वजह हो सकते हैं। भारी बस्ते उठाने से बच्चे की लोअर बैक अधिक झुकी अथवा टेढ़ी हो सकती है। इसके अलावा बैग के वजन से सामंजस् बैठाने के लिए वह आगे की ओर झुककर चलने लगता है जिससे उसकी कुदरती पोश्चर में बदलाव जाता है। इस पोश्चर में चलने से उसकी गर्दन् और पीठ की मांसपेशियों में काफी दबाव पड़ता है। इससे थकान और चोट का खतरा भी बढ़ जाता है।

भारी स्कूली बस्तों से मिडिल और लोअर बैक के कुदरती कर्व पर भी असर पड़ता है जिससे रीढ़ की हड़डी के जोड़ों और पंजरों में जलन हो सकती है। भारी बोझ के असर को कम करने के लिए बच्चा कंधा झुकाकर चलने लगता है। कंधों, गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से पर बहुत अधिक दबाव पड़ने से छाती में भी संकुचन होता है, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

बैग को एक कंधे पर टांगकर चलना बच्चों को स्टाइलिश नजर आता है। लेकिन इससे बच्चा एक ओर झुककर चलने लगता है। क्योंकि सारा वजन शरीर के एक ही हिस्से पर पड़ने लगता है। जिस ओर बच्चे ने बैग टांगा होता है उसके विपरीत ओर की लोअर बैक, पसलियां और मिडिल बैक की मांसपेशियों पर काफी तनाव आने लगता है। एक ही कंधे पर बैग टांगकर चलन से अपर बैक में दर्द भी हो सकता है। और साथ ही कंधों और गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव आने लगता है। गर्दन की मांसपेशियो पर बहुत अधिक दबाव पड़ने से जबड़े और सिर में दर्द हो सकता है। और आजकल स्कूल जाने वाले बच्चों में यह समस्या काफी आम हो गई है

पीठ पर लादे जाने वाले बस्तों से बच्चों की कमर पर बुरा असर पड़ता है। अधिक भारी या गलत तरीके से उठाये गए बैग से रीढ़ की हड्डी पर काफी दबाव पड़ता है। इससे बच्चा काफी आगे झुककर चलने लगता है, जिससे रीढ़ की हड्डी के कुदरती घुमाव पर भी विपरीत असर पड़ने लगता है। इससे उसके कंधे भी झुक जाते हैं, जिससे उनकी अपर बैक और ज्यादा मुड़ी हुई लगती है। कुछ छात्र अपने बैग को केवल एक ही कंधे पर टांगते हैं, इससे उनके एक ओर झुककर चलने की आशंका बढ़ जाती है। और साथ ही उनकी गर्दन में भी दर्द होता है। भारी स्कूली बैग् से तनाव, थकान और शारीरिक रूप से असहजता हो सकती है। इससे बच्चों की एकाग्रता और सीखने की क्षमता पर असर पड़ता है।
 


 



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