जन जन का विकास

प्रगति और विकास के लिए महंगाई आवश्यक एवं लाभप्रद है मंहगाई के कारण से ही आज आमजन की क्रय शक्ति बढ़ी है, जो वस्तुए दुर्लभ थी सहज सुलभ है मंहगाई अवरोध है कष्टदायी है इस मिथ्या भ्रम की स्थिति को समाप्त करे। मंहगाई के कारण ही हम प्रगति और विकास की ओर अग्रसर हो रहे है कृपया इसके समर्थन में अपने विचार बतायें एवं अपनी फोटो परिचय के साथ भेजें।

Monday, 18 May 2015

कृष्ण भक्त भी और भगवान भी

कृष्ण भक्त हैं, और भगवान भी हैं। और जो भी भक्ति में प्रवेश करेगा, वह भक्तसे शुरू होगा और भगवान पर पूरा हो जाएगा
इस संबंध में थोड़ी सी बात पीछे हुई है, लेकिन हमें समझ में नहीं आती है, इसलिए फिर दूसरी तरह से लौट आती है। मैंने प्रार्थना के संबंध में जो कहा, वह थोड़ा खयाल में लेंगे तो समझ में आ जाएगा। जैसा मैंने कहा कि प्रेयर नहीं, प्रेयरफुलनेस। ऐसा भक्ति का मतलब किसी की भक्ति नहीं होती, भक्ति का मतलब है, डिवोशनल एटिटयूड। भक्ति का मतलब है, भक्त का भाव। उसके लिए भगवान होना जरूरी नहीं है। भक्ति भगवान के बिना हो सकती है, ऐसा नहीं, भक्ति के कारण भगवान दिखाई पडना शुरू हुआ है। जिन लोगों का हृदय भक्ति से भरा है, उन्हें यह जगत भगवान हो जाता है। जिनका हृदय भक्ति से नहीं भरा है, वे पूछते हैं--भगवान कहां है? वे पूछेंगे। और उन्हें बताया नहीं जा सकता, क्योंकि वह भक्त के हृदय से देखा गया जगत है। वह भक्त के मार्ग से देखा गया जगत है।
जगत भगवान नहीं है, भक्तिपूर्ण ह्रदय जगत को भगवान की तरह देख पाता है। जगत पत्थर भी नहीं है, पत्थर की तरह हृदय जगत को पत्थर की तरह देख पाता है। जगत में जो हम देख रहे हैं, वह प्रोजेक्शन है, वह हमारे भीतर जो है उसका प्रतिफलन है। जगत में वही दिखाई पड़ता है, जो हम हैं। अगर भीतर भक्ति का भाव गहरा हुआ, तो जगत भगवान हो जाता है। फिर ऐसा नहीं है कि भगवान कहीं बैठा होता है किसी मंदिर मेंय फिर जो होता है वह भगवान ही होता है।
कृष्ण भक्त हैं, और भगवान भी हैं। और जो भी भक्ति में प्रवेश करेगा, वह भक्त से शुरू होगा और भगवान पर पूरा हो जाएगा। एक दिन जब वह बाहर भगवान को देख लेगा, तो उसने खुद ऐसा क्या कसूर किया है कि उसे भीतर भगवान नहीं दिखाई पड़ेंगे! भक्त शुरू होता है भक्त की तरह, पूरा होता है भगवान की तरह। यात्रा शुरू करता है जगत को देखने की देखता है उसे जो जगत में है। भक्तिपूर्ण हृदय से, डिवोशनल माइंड से, प्रेयरफुल, भक्तिपूर्ण, भावपूर्ण, प्रार्थनापूर्ण मन से देखता है जगत को। फिर धीरे-धीरे अपने को भी उसी तरह देख पाता है, कोई उपाय नहीं रह जाता। फिर ऐसा भी हो जाता है, जैसा रामकृष्ण को एक बार हुआ। बहुत मजे की घटना है।
रामकृष्ण को एक मंदिर में पुरोहित की तरह रखा गया था, दक्षिणेशवर में। बहुत सस्ती नौकरी थी। शायद सोलह रूपये महीने की नौकरी थी। पुजारी की तरह रखा था उनको। लेकिन दस-पांच दिन में ही तकलीफ शुरू हो गई, क्योंकि ट्रस्टियों को खबर मिली कि यह आदमी तो ठीक नहीं मालूम होता। भगवान को जो भोग लगाता है, पहले खुद चख लेता है। और भगवान पर जो फूल चढ़ाता है, सूंघ लेता है। तो छिपकर ट्रस्टियों ने आकर देखा मंदिर में कि मामला क्या है? देखा कि बड़े भाव से रामकृष्ण नाचते हुए भीतर आए, भोग पहले खुद को लगाया, फिर भगवान को लगायाय फूल पहले सूंघे, फिर भगवान को सुंघाए। ट्रस्टियों ने उनको पकड़ लिया और कहा, यह क्या कर रहे हो? यह कोई ढंग है भक्ति का? रामकृष्ण ने कहा, भक्ति का ढंग होता है, यह कभी सुना नहीं। भक्त देखे हैं, भक्त सुने हैं, भक्ति का कोई ढंग होता है? कोई ढांचा, कोई डिसिप्लिन होती है? उन्होंने कहा, निकाल बाहर करेंगे! कहीं सूंघा हुआ फूल भगवान को चढ़ाया जा सकता है? रामकृष्ण ने कहा, बिना सूंघे चढ़ा कैसे सकता हूं? पता नहीं सुगंध हो भी या न हो! ट्रस्टियों ने कहा, बिना भगवान को प्रसाद लगाए तुम खुद कैसे खा लेते हो? रामकृष्ण ने कहा, मेरी मां मुझे खिलाती थी तो पहले चख लेती थी। मैं बिना चखे नहीं चढ़ा सकता। नौकरी तुम सम्हालो। अन्यथा मुझे यहां रखना है, तो मैं चखूगां, फिर चढ़ाऊंगा। पता नहीं खाने योग्य हो भी या न हो!
अब यह जो आदमी है, यह आदमी बाहर ही भगवान को कैसे देख पाएगा? बहुत जल्दी वह वक्त आ जाएगा, यह कहेगा कि भीतर भी भगवान है। तो भक्त से तो शुरु होती है यात्रा, भगवान पर पूरी होती है। ऐसा नहीं है कि बाहर कहीं किसी भगवान पर पूरी होती है, अंततरू सारी दुनिया की यात्रा करके हम अपने पर लौट आते हैं और पाते हैंरू जिसे हम खोजने गए थे वह घर में बैठा हुआ है।
कृष्ण दोनों हैं। तुम दोनों हो, सभी दोनों हैं। लेकिन भगवान से शुरू नहीं कर सकते हो तुम। भक्त से ही शुरु करना पड़ेगा। क्योंकि अगर तुमने यह कहा कि मैं भगवान हूं, तो खतरा है। ऐसे कई लोग खतरा पैदा करते हैं, जो भगवान की घोषणा तो कर देते हैं, तब ऐसे लोग अहंकेंद्रित होकर, इगोसेट्रिक होकर दूसरों को भक्त बनाने की कोशिश में लग जाते हैं। क्योंकि उनके भगवान के लिए भक्तों की जरूरत है। पर वे दूसरें में भगवान नहीं देख पाते। अपने में भगवान देखते हैं, दूसरे में भक्त देखते हैं। ऐसे गुरुडम के बहुत घेरे हैं सारी दुनिया में। यात्रा शुरु करनी पड़ेगी भक्ति से।
अब कृष्ण को भगवान माना जा सकता है, क्योंकि यह आदमी घोड़े तक की भक्ति कर सकता है। सांझ का जब घोड़े थक जाते हैं तो उन्हें ले जाता है नदी पर स्नान कराने।
 उनको नहलाता है, उनको खुरे से साफ करता है। यह आदमी भगवान होने की हैसियत रखता है। क्योंकि घोड़े को भी भगवान की तरह स्नान करवा सकता है। इस आदमी से डर नहीं है, इससे खतरा नहीं है। यह अगर भगवान की अकड़ वाला आदमी होता तो सारथी की जगह बैठ नहीं सकता। अर्जुन से कहता, बैठो नीचे, बैठने दो ऊपर! रहा मैं भगवान, तुम हो भक्त! भगवान बैठेंगे रथ में, भक्त चलाएगा।
जो अपने को भगवान घोषित करते हैं, जरा उन्हें तख्त के नीचे बिठाल कर आप तख्त पर बैठ कर देखिए, तब पता चलेगा!
भक्त से शुरु होगी यात्रा, भगवान पर पूरी होती है।

Thursday, 14 May 2015

जन जन का विकास

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कल्याणं करोति का नेत्र शिविर

स्याल चैरिटेबिल फाउण्डेशन ट्रस्ट मेरठ, श्री वाई.पी. कौशल, कल्याणं करोति मेरठ (पंजीकृत) एवं जिला दृष्टिड्हीनता निवारण समिति (बागपत)  के संयुक्त तत्वाधान में लैन्स की सुविधा के साथ निरूशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन महावीर सिंह पूर्व प्रधान का निवास, ग्राम- दरकावदा, ब्लाक बिनौली, (बागपत) के प्रांगण में आयोजित किया गया। जिसमें १४२ नेत्र रोगियों की जांच अभिषेक गुप्ता द्वारा की गयी, सभी नेत्र रोगियों का निरूशुल्क दवाईयां वितरित करके १५ को मोतियाबिन्द के आपरेशन हेतु चयन किया गया। सभी नेत्र रोगियों को मोतियाबिन्द के आपरेशन हेतु कल्याणं करोति, मेरठ द्वारा संचालित निरूशुल्क चिकित्सालय कैन्टोनमैन्ट जनरल अस्पताल, मेरठ छावनी में लाया गया। 
सभी ऑपरेशन डा0 सतीश नागर एवं डा0 पी0पी0 मित्तल द्वारा किये गये। चश्में के लिए २० नेत्र रोगियों की जांच श्री अभिषेक गुप्ता द्वारा की गयी और ११ को रियायती दर पर चश्में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। शिविर को सफल बनाने हेतु सर्व श्रीमतीध्श्री डी.के. अग्रवाल, ईश्वरचन्द गुप्ता, रामपाल सिंह, बिजेन्द्र उर्फ विनय, दिलबाग सिंह, महिपाल सिंह, मीता एवं विजय आदि ने विशेष योगदान दिया।
कैन्टोनमैन्ट जनरल अस्पताल, बेगमपुल, मेरठ   पिन-२५०००१
फोन रू (का0) ०१२१-२६६४७२२, (अध्यक्ष) ९४१२२०६२१०, (महामंत्री) ९४५६८३८४५६ 

ओशो सत्संग और मेडिटेशन


स्कूल ऑफ लाइफ् गोमती धारा आत्मदर्शन की स्थिति कुंज बिहार में कार्यक्रम मैं प्रोफेसर वाचपति जी ने दीप जलाया कार्यक्रम शुभारम्भ हुआ।
ओशो का प्रवचन गीता दर्शन पर हुआ परिणाम की फिकर मत कर अर्जुन तू कर्म कर यही तेरा धर्म है। कृष्ण अर्जुन तू कर्म कर यही तेरा धर्म है। कृष्ण अर्जुन का समझाते हुए कहते जो व्यक्ति अकत्र्ता होकर कार्य करता है। वह कर्म अकर्म बन जाते है। फिर वह साधक अकत्र्ता बन जाता है।
स्वामी आत्मोकमरान ने कुण्डलिनी जागरण एक घण्टे का ध्यान कराया और अन्तर स्नान का अनुभव कराये। सभी मित्रो ने सहयोग दिया। रामानन्द जी, शिवकुमार, वन्दना, मोनिका, सत्यवीर जी आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
सदड्ढ्भावना समिति (पंजी.) स्वामी आत्मो कामरान 8057982656, 8273548730

स्वामी की सोच को किया सार्थक

पिछली सदी के आठवें दशक में स्वामी चिन्मयानंद ने कांगड़ा जिले के दो हजार गांवों में गरीबी मिटाने का संकल्प लिया। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने स्वयसेवी संस्था कार्ड (चिन्मय आर्गेनाइटेशन ऑफ रूरल डेवलपमेंट) का गठन किया। इसे चलाने के लिए उन्हें एक ऐसे नेतृत्व की तलाश थी जो उनकी सोच को अजाम तक पहुंचा सके। उनकी इस सोच को डॉ. क्षमा मेत्रेय ने साकार किया।
डॉ. क्षमा मेत्रेय नई दिल्ली के मोलाना अबुल कलाम आजाद मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विशेषज्ञ का पद छोड़कर कार्ड की राष्टड्ढ्रीय अध्यक्ष बनीं। १९८५ में संस्था की बागडोर संभाली और कुछ महिलाओं को सिलाई मशीनें बांटकर उन्हें आत्मनिर्भर करने का प्रयास शुरू किया। आज सस्था नौ सो गांवों में साक्षरता, स्वरोजगार व स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं प्रदान कर रही है। वह खुद वर्ष भर में करीब २० हजार रोगियों को चिकित्सा प्रदान करती है। इन्होंने १४ हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार के साधन से जोड़ा। विधिक साक्षरता में भी संस्था अहम योगदान दे रही है। करीब ८२७ मामलों में से ६१३ सुलझाए। पर्यावरण संरक्षण में भी संस्था अहम कार्य कर रही है। ६९५ गांवों में करीब २० हजार शौचालयों का निर्माण करवाया है।
महिला दिवस को सार्थक रूप तभी दिया जा सकता है, जब पुरुष भी महिलों का सम्मान करें। सबसे पहले महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना को उजागर करना होगा। लिंग भेदभाव को समाप्त करने के लिए महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों को भी आगे आना होगा।

Monday, 11 May 2015

Tips: Quit smoking


Smoking damages your blood vessels and raises your odds of eye problems, which are already higher because you have diabetes. If you smoke, get help from your doctor, a support group, or a smoking cessation program so you have strength to quit -- and stay smoke-free. The American Cancer Society and other groups sponsor 800-QUIT-NOW, a web site and phone service that gives free advice and support for quitting.

भ्रष्टाचार की जड़

भ्रष्टाचार  के समाधान के सभी प्रयास अप्रभावी रहे है  स्पष्ट है जड़ो पर कार्य होना चाहिए।जनप्रतिनिधियो  का चुनाव में बहुमत शब्द का भ्रामक प्रयोग भ्रष्टाचार की जड़  है - वर्तमान में  से १५प्रतिशत वोटो को बहुमत मानकर निर्वाचन  किया जा रहा है निर्वाचन अपने सम्बंधित  क्षेत्र की कुल जनसख्या का २/३ वोटो से ही होना चाहिए। इस भ्रामक स्थिति को ठीक किया जाना आवश्यक हैइसके प्रभाव से साम्प्रदायिकताविषमताअपराधीकरणआदि पर नियंत्रण होगा तथा विकास का मार्गप्रशस्त होगा 

कृपया इसके समर्थन में अपने विचार बतायें एवं अपनी फोटो परिचय के साथ भेजें।
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साईकिल ट्रैक उद्देश्यपूरक

उ0प्र0 के मुख्यमन्त्री की महत्वाकांक्षी श्साईकिल ट्रैक्य योजना प्रदेश के बड़े महानगरों में सकारात्मक हो चली है। पश्चिमी उ0प्र0 में मेरठ के बाद गाजियाबाद में भी इस के स्थान नियत होने के अलावा टेण्डर प्रक्रिया आदि के साथ बजट आवटन प्रक्रिया भी हो गई है। इस योजना को गरीब की सवारी व स्वास्थ्य की दृष्टिड्ढगत उच्चतम न्यायालय के सख्त रुख के बाद ट्रैक की व्यवस्था को राज्य सरकारों को अपनाना पड़ा। सड़क बनाकर गतिवान वाहनों की बढ़ती भीड़ ने साईकिल व पैदल चालकों के लिए समस्या बना डाली थी।
मेरठ मे सीताराम हॉस्टल मेरठ से मंगल पाण्डे नगर तक नियत किया गया है। साईकिल ट्रैक वहां गाजियाबाद में इसका स्थान हापुड़ चुंगी से विवेकानंद नगर तक प्रथम चरण शुरु हो चुका है। दूसरे चरण का नया गाजियाबाद आर ओबी से गोविन्दपुरम का भी निर्मित हो चुका है। पूरे प्रोजेक्ट पर ९ करोड़ प्राधिकरण खर्च कर रहा है। तीसरे ट्रैक पर विचार हो रहा है। यह एएलटी पलाई ओवर ब्रिज से हापुड़ चुंगी तक का है।
साईकिल ट्रैक पर आम जन यानि की दुपहिया साईकिल चालकों से जब बात की तो वह इस ट्रैक व्यवस्था से खुश नही थे। इनका कहना था कि हमे ट्रैक की उपलब्धता तो तब भी नही होगी। इन ट्रैकों पर अपेक्षा अनुरुप साईकिलिंग किया जाना संभव होगा इसमें संशय है। सड़कों के किनारे व अन्य पगडंडियों पर जिस तरह चलना दुष्कर है बड़े वाहनों के खड़े रहने या चलने के प्रयास अथवा इन पर अतिक्रमण कर कारोबार होते है उसे देखकर नही लगता की यह ट्रैक जिस लक्ष्य को लेकर बन रहे है। उनसे जनता को सुविधा मिलेगी। यह जरुर है कि प्रदेश की सरकार जिसका चुनाव चिन्ह ही साईकिल है अथवा लाभ की अपेक्षा करती हो।
साईकिल निर्माता जिन्होने अब साईकिल बनाना बंद कर दिया था या बंद करने में लगे थी वापस चेहरे पर मुस्कान ला बैठे। साईकिल मरम्मत के लगे लोग भी पुनरू इस कार्य में रुचि लेने लगे है। 
साईकिल ट्रैक प्रतीकात्मक न बने रहे
वरिष्ठ नागरिक कल्यान समिति अध्यक्ष ईआरएस गुप्ता का कहना था कि जिस शो शराबे के तहद बड़े शहरों में इक्का दुक्का साईकिल ट्रैक बन रहे है या बनाने का प्रस्ताव है इससे लोगो का स्वास्थ्य नही सुधरने वाला है। इस तरह यह प्रतीकात्मक रह जायेगे। जरुरत है सड़कों के किनारे दो और जो पटरी छोडी जाती है उसे साईकिल ट्रैक संरक्षित कर उस पर अतिक्रमण रोक कर इसके दुरुपयोग का रोका जाएं। 
साईकिल ट्रैंक तो हो गया पदैल चलने की राह भी तो
साईकिल ट्रैक पर उ0प्र0 सरकार द्वारा जिस तरह की कर्मठता का प्रदर्शन दिखाया जा रहा है। इसके बाद पैदल चलने वालों जिनमें वरिष्ठ नागरिक व महिला और बच्चों ने जिज्ञासा जाहिर की है की पैदल सड़क किनारे चलना या फिर साईकिल ट्रैक की तरह स्वास्थय बनाने हेतु घुमने की राह के लिए भी इस तरह प्रदेश सरकार सोचेगी और उपलब्ध करायेगी। आज सड़कों व अन्य रास्तों पर पदैल चलने वालों के साथ भी साईकिल चालकों से कम दुघर्टना नही होती है।
        -अतिथि सम्पादक निष्ठा अग्रवाल

Saturday, 9 May 2015

भ्रष्टाचार की जड़

भ्रष्टाचार  के समाधान के सभी प्रयास अप्रभावी रहे है  स्पष्ट है जड़ो पर कार्य होना चाहिए।जनप्रतिनिधियो  का चुनाव में बहुमत शब्द का भ्रामक प्रयोग भ्रष्टाचार की जड़  है - वर्तमान में  से १५प्रतिशत वोटो को बहुमत मानकर निर्वाचन  किया जा रहा है निर्वाचन अपने सम्बंधित  क्षेत्र की कुल जनसख्या का २/३ वोटो से ही होना चाहिए। इस भ्रामक स्थिति को ठीक किया जाना आवश्यक हैइसके प्रभाव से साम्प्रदायिकताविषमताअपराधीकरणआदि पर नियंत्रण होगा तथा विकास का मार्गप्रशस्त होगा 

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मन मोह लेता है ‘मनीप्लांट’

मनीप्लांट के पौधे लगभग सभी घरों में लगाए जाते हैं। यह क्यारियों, गमलों, डिब्बों आदि में लगाया जा सकता है। बहुत से लोगों का मानना है कि मनीप्लांट का पौधा घर में लगाने से सुख-समृद्धि भी आती है। मनीप्लांट को छांव वाले स्थान पर लगाना चाहिए। समय-समय पर इसकी सूखी शाखाओं और पत्तियों की काट-छांट करते रहना चाहिए। इससे पौधे की सुंदरता और निखर जाती है। अगर मनीप्लांट गमलों में लगे हैं तो साल-डेढ़ साल के अंतराल पर इन्हें दूसरे गमलों में लगा देना चाहिए।
मनीप्लांट के पौधों को समय.समय पर गोबर की खाद व नई मिट्टी देते रहना चाहिए। दो-तीन महीने के अंतराल पर इसके पौधों में चुटकीभर डीएपी व यूरिया खाद डालने से पत्तियां हरी बनी रहती हैं। इसकी पत्तियों के आकार-प्रकार एवं रंग के आधार पर मनीप्लांट को कई भागों में विभाजित किया गया है। इसकी कुछ प्रमुख किस्में इस प्रकार हैं।
गोल्डन पोथो- हल्के पीले धब्बों युक्त पत्तियों वाली यह प्रजाति काफी लोकप्रिय है। दरवाजे के आसपास लटकती इसकी पत्तियां सबका मन मोह लेती हैं।
मार्बल क्वीन- इसकी पत्तियां सुंदर, सफेद संगमरमरी रंग एवं हल्के हरे धब्बों वाली होती हैं।
मेक्रोफिला- मनीप्लांट की यह काफी लोकप्रिय किस्म है। इसकी पत्तियां बड़े आकार की और पीले धब्बों वाली होती हैं।
ग्रीन ब्यूटी- इसकी पत्तियां चिकनी हरे रंग की होती हैं।
सिल्वर मून- इसका यह नाम इसकी चमकीली क्रीम रंग की आकर्षक धब्बों वाली पत्तियों के कारण पड़ा।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयोग बनाने पर विचार करेगी सरकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों, बच्चों और महिलाओं की तर्ज पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आयोग गठित करने पर विचार कर सकती है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों के सवालों के जवाब में बताया, श्मैं कोई आश्वासन नहीं दे सकता कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आयोग गठित करेगी। लेकिन हम इस पर विचार कर सकते हैं।्य
वह बीजद के भतृहरि मेहताब के सवाल का जवाब दे रहे थे जिन्होंने सवाल किया था कि क्या सरकार अल्पसंख्यकों, पिछड़ों, महिलाओं और बच्चों की तर्ज पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी कोई आयोग गठित करने पर विचार कर रही है? गहलोत ने कहा कि सरकार अनुसूचित जातियों-जनजातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, मादक पदार्थों की लत के शिकार लोगों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं को क्रियान्वित करने के मकसद से गैर सरकारी संगठनों को अनुदान प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि एनजीओ द्वारा धन की हेराफेरी साबित होने पर मंत्रालय एनजीओ को काली सूची में डालने के लिए पहल करता है।
गहलोत ने बताया कि इस प्रकार के मामलों में 87 एनजीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और दस एनजीओ को काली सूची में डाला गया।

Friday, 8 May 2015

यह पब्लिक है सब जानती है

भाजपा के रणनीतिकार आप को बहुत हल्के में लेते हुए मान रहे थे कि मोदी की सदाबाहर लोक प्रियता के बूते पार्टी लगातार राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतती रहेगी। अहंकार के चलते नेतृत्व ने मान लिया था कि मोदी के राजनीतिक व्यक्तित्व के सामने कोई चुनौती नही है लेकिन भारतीय मतदाता जानते है कि राजनेताओ को है लेकिन भारतीय मतदाता जानते है कि राजनेताओ को कब वास्तविकता से अवगत कराया जाये। प्रधानमंत्री ने दिल्ली के विधानसभा चुनाव को अपने व्यक्तित्व पर जनमत बना दिया था, मतदाताओ ने उन्हे दो टूक आभास करा दिया कि उन्होने मतदाताओं के समर्थन का गलत अनुमान लगाया था।
लोकतंत्र में शासक जनता है जनप्रतिनिधि सेवक है। उन्हें जनता का दिल जीतने के लिये जनहित में योजनाएं बनाना उन्हे कार्यन्वित करना होगा। क्योकि यह पब्लिक है, सब जानती है।

बैंक हड़ताल से आमजन चिंतित वेतन सुविधा में केन्द्रकर्मी बराबर?

मुम्बई (महाराष्टड्ढ्र) केन्द्र सरकार व बैकों के संगठन आईबीए द्वारा यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) की बैक कार्मिकों की वेतन व अन्य समस्याओं के समाधान में ढुलमुल रुप अपनाने से बढते टकराव के कारण २५ से २८ फरवरी तक चार दिवसीय हड़ताल पर उद्यम व आम जन में चिंता बढ़ गई है। वित्तीय वर्ष १४-१५ के समाप्ति के पूर्व माह में बैकों की बंदी अर्थव्यवस्था को गड़बडा देगी।
फोरम के अध्यक्ष के के नायर कहते है कि बैंक कार्मियों के बीच दरार पैदा करने के प्रयास सफल न होगे बल्कि इस प्रयासों से बैंककर्मी अधिक सबल होकर अपनी समस्याओं को सरकार या आईबीए को न ही बल्कि जनता के समक्ष रखेगे। जनता की शाक्ति हो उन्हे समझाएंगी।
बैंक आफ बड़ौदा के के एक जिम्मेदार वरिष्ठ प्रबन्धक संजय अग्रवाल एवं इसी बैंक के निदेशक प्रेम मक्कड़ कहते है कि बैंक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ है फिर भी इस क्षेत्र की उपेक्षा को बैंक कर्मी को केन्द्र सरकार के कार्मिकों से कम वेतन पर जिम्मेदारियां अधिक यह अन्तर ४०-४५ प्रतिशत कम है। अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ के अध्यक्ष एस एस सिसौदिया ने उम्मीद जाहिर की कि सरकार व आईबीए द्वारा २१ से २४ जनवरी की हड़ताल को टालने के लिए जो सकारात्मकता दिखाई थी उसे ढुलमुलता को समय रहते खत्म किया जायेगा।
देश में सरकार द्वारा जो विकास की अपेक्षा की है उसे लाने मे बैंक भूमिका अग्रणी है वह बैंक कार्मियों की अपने केन्द्र कर्मी के समकक्षता लाना होगा। यूं जिम्मेदारी देखते हुए अपर स्तर सुविधाओं में मिलना चाहिए।
सातंवा वेतन आयोग पर केन्द्र चुप्पी से असमजस्य
पूर्ववती भारत सरकार द्वारा गत वर्ष सातंवा वेतन आयोग गठन की घोषणा की गई थी, वर्तमान केन्द्र सरकार की इस पर चुप्पी ने केन्द्र व राज्य कर्मचारियों मे बैचनी बढा रही है और इनके स्तर पर भी आन्दोलन की तैयारी का समाचार है। बैंक कार्मिकों के वेतन व केन्द्र सरकार के कार्मिक वेतन मानों में अन्तर की दिवार न बढे इसके लिए जरुरी है कि बैंक व केन्द्र कार्मिकों के वेतन पुनरीक्षण का कार्य साथ हो या फिर केन्द्र सरकार वेतन वृद्धि व सुविधाओं के निर्धारण के मापदण्ड नियत करें, तब ही प्रधानमन्त्री का सबका साथ सबका विकास का आवाहन रास्ता पा सकता है,यह विचार श्रमशिखर के पाठक एवं चितंक नई दिल्ली के प्रमुख व्यवसायी, चितंक श्री रवि प्रकाश मित्तल व्यक्त किए। श्री मित्तल समय-समय पर केन्द्र सरकार स्तर पर अपने विचारों से अवगत कराते रहते है। उन्होने बैंक, बिजली व सरकारी कार्मिकों के आन्दोलनों की स्थिति लाये जाने को बेहतर सरकार की स्थिति में नही लाता। हड़ताल की स्थिति आपसी विश्वास को परिलक्षित करती है, जबकि काम कराने व करने वाले के बीच सबसे अहम है।
श्रमशिखर से बातचीत में श्रमशिखर के हमारों पाठकों ने बैंक या केन्द्र कर्मचारियों की समस्याओं बनें रह कर उन्हे टालने की प्रकृति या फिर निजी क्षेत्र को समस्याओं के समाधान की बढती प्रकृति को अहितकर बताया। सरकारी व निजी के प्रतिस्पर्धा में रहना देश हित में है।

Thursday, 7 May 2015

स्टेशन आने से पहले जगाएगी अलर्ट सुविधा

ट्रेन में रात के समय सफर करने वाले बहुत से यात्रियों को गंतव्य स्टेशन आने से पहले उठने में काफी परेशानी होती है। कई बार तो आंख न खुल पाने से ट्रेन आगे निकल जाती है और उन्हें वापस आने में बहुत दिक्कत झेलनी पड़ती है। इस परेशानी का निराकरण करने के लिए रेलवे ने १३९ पर फोन कर वेकअॅप कॉल-डेस्टिनेशन alert  की निम्नलिखित नई सुविधा कुछ ही दिन पहले शुरू की है। इससे गंतव्य स्टेशन आने से पहले ही मोबाइल पर अलार्म बज उठेगा
पहले alert  टाइप करें, फिर PNR Number टाइप करें, फिर १३९ पर Send करें और इसके बाद PNR Number एक्टिवेट हो जाएगा।    

‘आप’ के ट्रैक पर देर से दौड़ेगी की बजट की गाड़ी

आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली का बजट पेश करने में किसी तरह की हड़बड़ी के मूड में नहीं है। दिल्ली डॉयलॉग कमीशन की टास्क फोर्स गठित होने और उसकी सिफारिश आने का इंतजार किया जाएगा।
जिन 10 विधान सभा में जनता के सुझाव से बजट का प्रावधान किया जाना हैए वह प्रक्रिया भी इस दौरान पूरी की जाएगी। हालांकि लेखानुदान से सरकार खर्चों में कटौती की शुरुआत कर सकती है। दिल्ली सरकार का बजट 37 हजार करोड़ रुपये का है। वित्त वर्ष में लोकसभा और विस का चुनाव आने से बेशक प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए, खर्चे कम हुए लेकिन वसूली में 4300 करोड़ रुपये की कमी हुई। अधिकारी बता रहे हैं कि लेखानुदान में कटौती बहुत जरूरी है। लेखानुदान इसलिए लेना है ताकि कर्मियों के वेतन व अन्य खर्चों की व्यवस्था की जा सके। सूत्र बताते हैं कि लेखानुदान तीन महीने का लिया जाएगा। इसके लिए विस का सत्र मार्च के अंतिम सप्ताह में दो दिन का होगा। इसकी तैयारी योजना व वित्त विभाग के अधिकारियों ने शुरू भी कर दी है।
सरकार का पूर्ण बजट मई में आएगा। तब तक दिल्ली डॉयलॉग कमीशन में दिए गए मोबाइल पर सरकार, वाई-फाई और सीसीटीवी वाली दिल्ली, अनधिकृत कॉलोनी नियमन, झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास, जॉब और जॉब सिक्योरिटी जैसे विषयों को दिल्ली के पूर्ण बजट में शामिल किए जाने की तैयारी है।

चलना होगा साथ

जम्मू-कश्मीर के विकास पर, चलना होगा साथ
राष्टड्ढ्र के हित में करनी होगी, अब तो सारी बात।
अब आंतकवाद की गंध, न केसर क्यारी में फैले
राष्टड्ढ्र-प्रेम, विश्वास, एकता पर, न हो अब आघात।।
        अपने पांव पर आप कुल्हाड़ी मारी, कुछ दीवानो ने।
        मानवता को लज्जित कर डाला, ऐसे इंसानों ने।।
        इस सुन्दर घाटी का समुचित विकास रुक गया यूं।
        बरसों लग जायेगें इसको विकसित कर पाने में।।

Wednesday, 6 May 2015

भ्रष्टाचार की जड़

भ्रष्टाचार  के समाधान के सभी प्रयास अप्रभावी रहे है  स्पष्ट है जड़ो पर कार्य होना चाहिए।जनप्रतिनिधियो  का चुनाव में बहुमत शब्द का भ्रामक प्रयोग भ्रष्टाचार की जड़  है - वर्तमान में  से १५प्रतिशत वोटो को बहुमत मानकर निर्वाचन  किया जा रहा है निर्वाचन अपने सम्बंधित  क्षेत्र की कुल जनसख्या का २/३ वोटो से ही होना चाहिए। इस भ्रामक स्थिति को ठीक किया जाना आवश्यक हैइसके प्रभाव से साम्प्रदायिकताविषमताअपराधीकरणआदि पर नियंत्रण होगा तथा विकास का मार्गप्रशस्त होगा 

कृपया इसके समर्थन में अपने विचार बतायें एवं अपनी फोटो परिचय के साथ भेजें।
आपके आर्थिक सहयोग का स्वागत  है

 
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Tuesday, 5 May 2015

अमलतास

अमलतास के फूल झर गये धीरे से
कल तक जिसने प्यार किया
जब रूठे तो  मनुहार किया
आज वही अलि वादा अपना भूल गये
प्यार का प्रतिदान ऐसा भी है क्या
प्यास से जलते अधर दो मिल गये
माधुरी पीकर कहीं को उड़ चले
शेष  केवल रह गयी बेबस सी चाह
काँपती जाती  डगर है दूर तक
कल थे जो अपने वह न हैं यहाँ
साथ देने से भी उसको क्या मिला
हैं कहाँ वह और मंजिल है कहाँ
ठहर कर के दो पलों को सो लिया
बैठ कर छाया  में आँखें मूंदकर
स्वप्न में डूबा पथिक फिर चल पड़ा
अब किसी अनजान मंजिल के लिये
जिन पर था विश्वास उन्होंने कुचल दिया
रुँधे गले से दूब कह रही धीरे से
मीत खो गये गीत सो गये
अमलतास के फूल झर गये धीरे से

आम-आदमी की आंकाक्षाओ पर खरा उतरना है

आम-आदमी के जोश-जनून में नही है कोई शंका।
दिल्ली में आम-आदमी पार्टी का खूब बज रहा डंका।।
आम-आदमी की ताकत को, जो नेता थे गये भूल।
आम-आदमी के साहस ने उन्हे दय बार चटा दी धूल।।
गली-मुहल्लो-चैराहो पर आम आदमी की चर्चा सर्वत्र।
आम आदमी ने रच दिया, इतिहास एक विचित्र।।
आम-आदमी ही माध्यम, चुनाव में जीत-हार का।
कोरे आश्वासन झूठे वादो, के मृदुल व्यवहार का।।
लेकिन आम-आदमी का सवाल, सवाल ही रह जाता।
नेताओ से उसका, क्यो नही उत्तर भी बन पाता।।
आश्वासन के कटघरे में, खड़ा हुआ आम आदमी।
अपनी जायज मागों पर, अड़ा हुआ आम आदमी।।
अक्सर हर रोज, अपना बयान जाहिर करता है।
अपने अधिकारो की, मांग करने से नही डरता है।।
दिल्ली के मुख्यमंत्री, अब अपना कर्तव्य निभायेगे।
दिल्ली वासियो की, सभी समस्याओ को निपटायेगे।।
आमजन को मिलेगा, समय पर बिजली व पानी।
प्रशासनिक अधिकारी, नही कर पायेगे मन मानी।।
व्यवस्था-सुधारने को, तत्पर हुए है केजरीवाल।
जन लोकपाल बिल पर भी, अमल होगा तत्काल।।
स्वच्छ दिल्ली-स्वस्थ दिल्ली के साथ हो प्रशासन का सुधार।
अपराध-नियंत्रण के लिए, कमर कसे अब दिल्ली सरकार।।
आम-आदमी पार्टी को यदि अब आगे बढना है।
आम-आदमी की आंकाक्षाओ पर खरा उतरना है।।
सुशासन कैसे लाये, आम आदमी पार्टी को चुनौती है।
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि सेवक, जनता शासक होती है।।

अपने लिए आप ही जिम्मेदार हैं जनाब!

सच यह है कि आपके जीवन के लिए आपके सिवा और कोई जिम्मेदार नहीं हो सकता है। अपनी सेहत, अपनी खुशियों, करियर में प्रगति, वित्तीय सुरक्षा, रिश्तों में सकारात्मकता, समय के सदुपयोग और मन की शांति आदि के लिए आप ही जिम्मेदार हैं। जिस दिन आप यह समझ लेंगे, उसी दिन से अपने जीवन में प्रगति की ओर आपके कदम खुद-ब-खुद ही बढ़ जाएंगे। याद रखिए कि आज आप जिन स्थितियों का अनुभव कर रहे हैं, वे सब अतीत में आपने ही चनी थीं। इसमें दूसरों की राय पर आगे बढना भी शामिल  हो सकता है। अगर आप बेहतर परिणाम चाहते हैं, तो आज से ही बेहतर चयन करना सीख लें।
अगर अपको लगता है कि जीवन या कोई स्थिति अपने-आप ही बेहतर में बदलेगी, तो निश्चित मानिए कि आपको निराशा ही हाथ लगेगी। आपको खुद इसके लिए कुछ करना होगा। इसीलिए अपने जीवन में बदलाव लाने की जिम्मेदारी लें। पूरी जिम्मेदारी। अपने जीवन के खुद मालिक बनें। उसका खाका खुद तैयार करें, ताकि वह आपके सपनों, लक्ष्यों और आकांक्षाओं का आईना बन सकें। इसके लिए आज से ही इन तीन बातों को अपनाएं...
दूसरों को दोष देना आज से बंद
बचपन से ही आप अपनी खामियों के लिए किसी दूसरे को दोष देते आए हैं। हालांकि अपने माता-पिता, टीचर, सहकर्मियों, अधिकारियों, सरकार, मौसम किस्मत, सितारे, ग्रह और कुंडली जैसी चीजों पर दोष मढ़कर आपको मिला कुछ नहीं। और न ही कभी मिल सकता है। इन पर आपका नियंत्रण है क्या? आप उस पर ध्यान लगाएं, जिस पर आपका नियंत्रण है- वह हैं आप स्वयं।
अब बस भी करो बहानें
हर बार जब आप किसी असमर्थता के लिए कोई बहाना लगाते हैं, बेहतरी का एक मौका गंवा रहे होते हैं। साथ ही आप एक ढीले-ढीले या अव्यावसायिक नजरिए वाले व्यक्ति की छवि अपने लिए गढ़ते हैं। अधिकतर लोग बहाने इसलिए गढ़ते हैं, क्योंकि उन्हें असफल होने से डर लगता है। पर अगर इस डर का सामना करें तो असफल होने से डर बंद हो जाएगा। आसान स्थितियों के बजाय अपने लिए कुछ चुनौतीपूर्ण चुनने की हिम्मत बंधेगी। जैसे ही आप कुछ चुनौतीपूर्ण अपने हाथ में लेंगे, आपका खुद पर तो विश्वास बढ़ेगा ही, दूसरे भी आप पर विश्वास करेेंगे। इस तरह नए अवसर आप तक पहुंचेंगे।
शिकायत क्यों और किससे?
सच मानिए कि शिकायती शख्सियतें किसी को पसंद नहीं आतीं। शिकायत करने से आपकी और दूसरों की शक्ति भी जाया होती है। यह सच है कि कभी-कभी अपने आक्रोश को अभिव्यक्त करने का मन जरूर करता है। इसके बारे में बात करना एक स्वस्थ तरीका है। या फिर इसकी चर्चा करके इसमें सुधार करने वाले बिंदुओं को पहचानकर उस दिशा में कुछ करना बहुत फायदेमंद है। पर हर वक्त शिकायत करते रहकर आप एक पीडि़त की छवि तैयार करते हैं।
मैंने देखा है कि लोग जैसे ही अपने कर्मों और जीवन की जिम्मेदारी खुद लेना शुरू करते हैं, वे बहुत ऊर्जावान हो जाते हैं, उनमें प्रेरणात्मक नजरिया बढ़ जाता है और संकल्प की दृढ़ता भी बढ़ती है। इसीलिए आज से ही अगले तीस दिनों का लक्ष्य यह बनाएं कि आप किसी को दोष नहीं देंगे, शिकायत नहीं करेंगे और बहाने नहीं बनाएंगे। जब आप अपनी जिम्मेदारी लेना शुरू करेंगे, तो आपको ये सात अनुभव जरूर होंगेरू-
१. आजादी का आनंद रू अपने जीवन में खड़ी चुनौतियों के कारणों और उनके समाधान की खोज जब आप अपने अंदर करेंगे तो आपको एक अलग ही आजादी का अनुभव होगा। आपको महसूस होगा कि आप सोच-समझकर खुद का जीवन खुद ही संवार सकने में समर्थ हैं।
२. स्थायी प्रेरणा रू कठिन समय का सामना करने के लिए हम सबको प्रेरणा की जरूरत होती है। जब आप खुद के भीतर देखते हुए जीना शुरू करेंगे, जब आपको प्रेरणा का कभी खत्म न होने वाला स्त्रोत मिल जाएगा। अंतर्मन से उठने वाली प्रेरणा से जीवन उत्साह और आनंद से भर जाएगा।
३. बेहतर नियंत्रण रू जब आप अपने जीवन की कमान खुद संभालेंगे तो खुद का चयन होगा, खुद के चुने हुए कर्म होंगे, खुद के सीचे निर्णय होंगे। और इन सबसे आप खुद को ज्यादा सामथ्र्यवान और नियंत्रण में अनुभव करेंगे।
४. निजी शक्ति रू यह अनुभव सकारात्मकता का होगा। यह वह भावना है, जिसमें आपको अपने विकास, पालन-पोषण आदि के लिए स्वयं के संपूर्ण होने का एहसास होता है। यह भावना लक्ष्य तक पहुंचाने में ईधन का काम करती है।
५. नयेपन का आगाज रू जब आप मन से शांत होते हैं, आजाद होते हैं और नए विचारों के लिए मन खुला रखे होते हैं, तो जीवन में कई श्अरे वाह्य कहने वाले मौके आते हैं। खुद की जिम्मेदारी खुद लेने की प्रक्रिया में हर दिन आपका अपनी रचनात्मकता के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है।
६. नजरिए का विस्तार रू अब तक आपको अपने अनुभवों की सीखों से ही काम लेना आता है, जबकि कई अन्य तरीके भी संसार से भरे पड़े हैं। जब आप उनके प्रति खुलेंगे तो सोच का दायरा भी बढ़ेगा।
७. मन की शांति रू यह तो हर किसी को चाहिए। जब आप शिकायत व बहानों का सहारा लेते हैं तो नकारात्मकता से खुद को जला रहे होते हैं।
इससे उलझनें बढ़ती हैं। जब खुद की जिम्मेदारी खुद लेना शुरू करते हैं, तो श्क्या हुआ, किसने किया्य जैसे प्रश्नों में फंसने के बजाय श्आगे क्या करना है्य सोचते हैं।
कुछ बातों पर विचार करें
२ अगर आप शिकायत करना या बहाने बनाना छोड़ दें तो अपने बारे में क्या राय बनेगी और कैसा महसूस होगा?
      -आगामी अंक में जारी....
२ अपने जीवन की हर चीज के लिए खुद जिम्मेदारी लेने पर क्या होगा? इससे आपको फायदा कैसे होगा?
२ इस आदत को विकसित करने और उसे बनाए रखने के लिए आपको क्या करना होगा?

Monday, 4 May 2015

रेल सफर में तत्काल मदद को हैल्पलाइन

राजकीय रेलवे पुलिस ने ३ मार्च को निम्नलिखित हैल्पलाइन सेवा का शुभारंभ किया है, जिसके जरिये उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा के अंदर रेल सफर में यात्री चोरी, लूट, डकैती, मारपीट, छेड़खानी, हत्या, जहरखुरानी जैसे मुश्किल हालात में डायल कर शिकायत दर्ज करा कर मदद ले सकते हैंरू-  हैल्पलाइनरू १५१२

Sunday, 3 May 2015

मानव जाति की एकता में ही सारे जगत की खुशहाली निहित है

(1) मानव जाति की एकता में सारे जगत् की खुशहाली निहित हैः-
संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2012 में प्रतिवर्ष 20 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय खुशी दिवस मनाने की घोषणा की। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य विश्व के सभी व्यक्तियों तथा बच्चों के जीवन में खुशहाली, एकता, शान्ति तथा समृद्धि लाना है। हमारा मानना है कि मानव जाति की एकता में ही सारे जगत की प्रसन्नता निहित है। इसके लिए सारी धरती पर यह विचार फैलाने का समय अब आ गया है कि मानव जाति एक है, धर्म एक है तथा ईश्वर एक है। हमारा मानना है कि धार्मिक विद्वेष, शक्ति प्रदर्शन के लिए शस्त्रों की होड़ तथा साम्राज्य विस्तार की नीति से आपसी बैर-भाव पैदा होते हैं जबकि मानव जाति की एकता में ही सारे जगत् की खुशहाली निहित है। हम विगत 55 वर्षों से बच्चों की शिक्षा के माध्यम से एक न्यायप्रिय विश्व व्यवस्था के लिए प्रयासरत हैं। हमारा लक्ष्य शिक्षा के माध्यम से एक युद्धरहित संसार विकसित करके विश्व के दो अरब से अधिक बच्चों तथा आगे आने वाली पीढियों का भविष्य सुरक्षित करना है।
(2)  चिन्ता चिता के समान होती हैरू-
मनुष्य का जीवन सदैव से अनेक चिन्ताओं से ग्रसित रहा है। चिता तो मृत व्यक्ति को जलाती है, लेकिन चिंता की अग्नि जीवित व्यक्ति को ही जलाकर खाक कर देती है। इसलिए कहा जाता है कि चिन्ता चिता के समान होती है। चिन्तायें कई प्रकार की होती हैं जो कि जीवन का सुख-चैन समाप्त करने में लगी रहती हैं। जैसे- बच्चे, स्वास्थ्य, शिक्षा, कैरियर, भविष्य, पद, व्यवसाय, मुकदमा, शादी-ब्याह, मान-सम्मान, कर्जा, बुढा़पा आदि से जुड़ी चिंतायें। चिंताओं से ग्रसित व्यक्ति के लक्षण तनाव, कुंठा, क्रोध, अवसाद, रक्तचाप, हृदय रोग आदि के रूप में दिखाई देते हैं। चिंताओं से बुरी तरह ग्रसित व्यक्ति की अंतिम मंजिल आत्महत्या, हत्या या अकाल मृत्यु के रूप में प्रायरू दिखाई देता है। ये दुरूखदायी स्थितियाँ हमारी शारीरिक, भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक विकास में एक बड़ी बाधा बनती हैं।
(3) एक शुद्ध, दयालु एवं ईश्वरीय प्रकाश से प्रकाशित हृदय धारण करनारू-
आत्मा के पिता परमात्मा की सदैव यह चिन्ता रहती है कि मेरे को दुरूख हो जाये किन्तु मेरी संतानों को कोई दरूुख न हो। परमात्मा अपनी संतानों के दुरूखों को दूर करने के लिए स्वयं धरती पर राम, कृष्ण, बुद्ध, ईशु, मोहम्मद, महावीर, नानक, बहाउल्लाह आदि अवतारों के माध्यम से अवतरित होता हैं। ये अवतार संसार से जाने के पूर्व गीता, रामायण, वेद, कुरान, बाइबिल, गुरू ग्रन्थ साहिब, त्रिपटक, किताबे अकदस, किताबे अजावेस्ता आदि जैसी पवित्र पुस्तकें हमें देकर जाते हैं। इन पुस्तकों का ज्ञान हमें अपनी सभी प्रकार की चिन्ताओं को प्रभु को सौंपकर चिंतामुक्त होने का विश्वास जगाता है। सभी चिन्ताओं को प्रभु को सौंपने के बाद हमारी केवल एक चिंता होनी चाहिए कि मैं सौगंध खाता हूँ, हे मेरे परमात्मा! कि तूने मुझे इसलिए उत्पन्न किया है कि मैं तुझे जाँनू और तेरी पूजा करूँ। तुझे जानने का अर्थ है कि तेरी शिक्षाओं को जाँनू और तेरी पूजा करने का अर्थ है कि तेरी शिक्षाओं पर चलँू। एक शुद्ध, दयालु एवं ईश्वरीय प्रकाश से प्रकाशित हृदय धारण करके पवित्र ग्रन्थों की गहराई में जाना परमात्मा रूपी चिकित्सक से अचूक इलाज का यह सबसे सरल तरीका है।
(4) मनुष्य को केवल एक ही चिन्ता करनी चाहिएरू-
मैंने एक बार अपनी चिन्ताओं की लिस्ट बनाने का विचार किया तथा इन चिन्ताओं की लिस्ट बनाने पर जब मैंने उनकी गिनती की तो वे 215 तक पहुँच गयी थी। इसके थोड़ी देर के बाद ही मैंने महसूस किया कि इसमें अभी कुछ चिन्तायें लिखनी छूट गयी हैं। तब घबराहट में मेरे अंदर विचार आया कि जब चिन्तायें इतनी ज्यादा हैं तो उनकी लिस्ट बनाने से क्या फायदा? इसलिए प्रिय मित्रों, मनुष्य की केवल एक ही चिन्ता होनी चाहिए कि वह अपने प्रत्येक कार्य के द्वारा परमात्मा की इच्छा का पालन कर रहा है या नहीं? इसके बाद मनुष्य को अपनी सारी चिन्ताओं को परमात्मा को सौंप देना चाहिए। हमारा मानना है कि अब भाव रहित शब्दों द्वारा चिन्ह पूजा के दिन लद गये। अब हमारे प्रत्येक कार्य-व्यवसाय ही प्रभु प्रार्थना का सबसे सशक्त माध्यम है।
(5) आज की समस्या मानव हृदयों के बीच की दूरियाँ हैंरू-
आज की सबसे बड़ी समस्या पति-पत्नी के बीच दूरियाँ, परिवारजनों के बीच की दूरियाँ, जातियों के बीच की दूरियाँ, धर्मों के बीच की दूरियाँ तथा राष्ट्रों के बीच की दूरियाँ हैं। हम अपनी समस्याओं के हल के लिए दुनियाँ भर में तो पागलों की तरह दौड़ते फिरते हैं लेकिन इन समस्याओं का हल हम पवित्र ग्रन्थों की शिक्षाओं में खोजने का जरा सा भी प्रयास नहीं करते हैं। इस तरह अपनी मर्जी पर चलते हुए हम अपने स्वयं के लिए तथा समाज के लिए समस्याओं की संख्या में वृद्धि करते जाते हैं। जबकि हमें प्रभु निर्मित समाज को रहने योग्य बनाने के लिए अब हृदयों की एकता के लिए पूरी तरह से लग जाना हैं। यही व्यक्तिगत, पारिवारिक तथा सामाजिक सभी समस्याओं का एकमात्र हल है और यह सही है कि पारिवारिक एकता ही विश्व एकता की आधारशिला है।
(6) जीवन को खुशहाल बनाने हेतु महापुरूषों के कुछ विचाररू-
महात्मा गाँधी - खुशी तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, इन सभी में सामंजस्य हों। दलाई लामा - प्रसन्नता कोई पहले से निर्मित वस्तु नहीं है। वो आपके कर्मों से आती है। बेंजामिन फ्रैंकलिन - पैसे ने कभी किसी को खुशी नहीं दी है, और न देगा, उसके स्वभाव में ऐसा कुछ नहीं है जिससे खुशी उत्पन्न हो। ये जितना ज्यादा जिसके पास होता है वो उतना ही इसे चाहता है। डेल कार्नेगी - याद रखिये खुशी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कौन हैं या आपके पास क्या है? ये पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आप क्या सोचते हैं। आस्कर वाइल्ड - कुछ लोग जहाँ जाते हैं वहां खुशियाँ लाते हैं, कुछ लोग जब जाते हैं तब खुशियाँ लाते हैं। अरस्तु- प्रसन्नता हम पर ही निर्भर करती है। मार्कस औरेलियास - आपके जीवन की प्रसन्नता आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। चाणक्य - जब आप किसी काम की शुरूआत करें, तो असफलता से मत डरें और उस काम को ना छोड़ें जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं वो सबसे प्रसन्न होते हैं। अब्राहिम लिंकन - अधिकतर लोग उतने ही खुश होते है, जितना वे स्वयं चाहते हैं।
(7) एक छोटी सी प्रेरणादायी कहानी- खुशी हमारे मन में छिपी हैरू-
एक बार की बात है कि एक शहर में बहुत अमीर सेठ रहता था। अत्यधिक धनी होने पर भी वह हमेशा दुखी ही रहता था। एक दिन ज्यादा परेशान होकर वह एक ऋषि के पास गया और अपनी सारी समस्या ऋषि को बताई। उन्होंने सेठ की बात ध्यान से सुनी और सेठ से कहा की कल तुम इसी वक्त फिर से मेरे पास आना मैं कल ही तुम्हें तुम्हारी सारी समस्याओं का हल बता दूँगा। सेठ खुशी-खुशी घर गया और अगले दिन जब फिर से ऋषि के पास आया तो उसने देखा कि ऋषि आश्रम के बाहर सड़क पर कुछ ढूँढने में व्यस्त थे। सेठ ने गुरुजी से पूछा कि महर्षि आप क्या ढूँढ रहे हैं, गुरुजी बोले की मेरी एक अंगूठी गिर गयी है मैं वही ढूँढ रहा हूँ पर काफी देर हो गयी है लेकिन अंगूठी मिल ही नहीं रही है। यह सुनकर वह सेठ भी अंगूठी ढूँढने में लग गया, जब काफी देर हो गयी तो सेठ ने फिर गुरुजी से पूछा कि आपकी अंगूठी कहा गिरी थी? ऋषि ने जवाब दिया कि अंगूठी मेरे आश्रम के अन्दर गिरी थी पर वहाँ काफी अंधेरा है इसीलिए मैं यहाँ सड़क पर ढूँढ रहा हूँ। सेठ ने चैंकते हुए पूछा की जब आपकी अंगूठी आश्रम के अन्दर गिरी है तो यहाँ बाहर सड़क पर क्यों ढूँढ रहे हैं? ऋषि ने मुस्कुराते हुए कहा की यही तुम्हारे कल के प्रश्न का उत्तर है, खुशी तो मन में छुपी है लेकिन तुम उसे धन में खोजने की कोशिश कर रहे हो। इसीलिए तुम दुखी हो, यह सुनकर सेठ ऋषि के पैरों में गिर गया। तो मित्रों, यही बात हम लोगों पर भी लागू होती है जीवन भर पैसा इकऋा करने के बाद भी इंसान खुश नहीं रहता क्योंकि हम पैसा कमाने में इतना अधिक व्यस्त हो जाते हैं कि हम अपनी खुशी आदि सब कुछ भूल जाते हैं।
(8) सहयोग करो, सहयोग करो, ओ प्रभु की संतानोंरू-
एक बार पचास लोगों का गु्रप किसी सेमीनार में हिस्सा ले रहा था। सेमीनार शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे कि स्पीकर ने अचानक ही सबको रोकते हुए सभी प्रतिभागियों को गुब्बारे देते हुए बोला , श्आप सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से अपना नाम लिखना है।्य सभी ने ऐसा ही किया। अब गुब्बारों को एक दूसरे कमरे में रख दिया गया। स्पीकर ने अब सभी को एक साथ कमरे में जाकर पांच मिनट के अंदर अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने के लिए कहा। सारे प्रतिभागी तेजी से रूम में घुसे और पागलों की तरह अपना नाम वाला गुब्बारा ढूंढने लगे। पर इस अफरा-तफरी में किसी को भी अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिल पा रहा था। पांच मिनट बाद सभी को बाहर बुला लिया गया। स्पीकर बोला, श्अरे! क्या हुआ, आप सभी खाली हाथ क्यों हैं? क्या किसी को अपने नाम वाला गुब्बारा नहीं मिला?्य नहीं! हमने बहुत ढूंढा पर हमेशा किसी और के नाम का ही गुब्बारा हाथ आया।्य एक प्रतिभागी कुछ मायूस होते हुए बोला। श्कोई बात नहीं, आप लोग एक बार फिर कमरे में जाइये, पर इस बार जिसे जो भी गुब्बारा मिले उसे अपने हाथ में ले और उस व्यक्ति का नाम पुकारे जिसका नाम उस पर लिखा हुआ है।्य स्पीकर ने निर्देश दिया।
(9) सहयोग से होगा सर्वोदय सुनो ओ प्रभु की संतानोंरू-
एक बार फिर सभी प्रतिभागी कमरे में गए, पर इस बार सब शांत थे और कमरे में किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं मची हुई थी। सभी ने एक दूसरे को उनके नाम के गुब्बारे दिए और तीन मिनट में ही बाहर निकले आये। स्पीकर ने गम्भीर होते हुए कहा, श्बिलकुल यही चीज हमारे जीवन में भी हो रही है। हर कोई अपने लिए ही जी रहा है, उसे इससे कोई मतलब नहीं कि वह किस तरह औरों की मदद कर सकता है , वह तो बस पागलों की तरह अपनी ही खुशियां ढूंढ रहा है, पर बहुत ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नहीं मिलता, दोस्तों हमारी खुशी दूसरों की खुशी में छिपी हुई है। जब तुम औरों को उनकी खुशियां देना सीख जाओगे तो अपने आप ही तुम्हें तुम्हारी खुशियां मिल जाएँगी और यही मानव-जीवन का उद्देश्य है।्य हमारा विश्वास है कि मानव जाति की एकता में सभी की खुशहाली, शान्ति, एकता तथा समृद्धि निहित है।