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Monday, 11 May 2015

साईकिल ट्रैक उद्देश्यपूरक

उ0प्र0 के मुख्यमन्त्री की महत्वाकांक्षी श्साईकिल ट्रैक्य योजना प्रदेश के बड़े महानगरों में सकारात्मक हो चली है। पश्चिमी उ0प्र0 में मेरठ के बाद गाजियाबाद में भी इस के स्थान नियत होने के अलावा टेण्डर प्रक्रिया आदि के साथ बजट आवटन प्रक्रिया भी हो गई है। इस योजना को गरीब की सवारी व स्वास्थ्य की दृष्टिड्ढगत उच्चतम न्यायालय के सख्त रुख के बाद ट्रैक की व्यवस्था को राज्य सरकारों को अपनाना पड़ा। सड़क बनाकर गतिवान वाहनों की बढ़ती भीड़ ने साईकिल व पैदल चालकों के लिए समस्या बना डाली थी।
मेरठ मे सीताराम हॉस्टल मेरठ से मंगल पाण्डे नगर तक नियत किया गया है। साईकिल ट्रैक वहां गाजियाबाद में इसका स्थान हापुड़ चुंगी से विवेकानंद नगर तक प्रथम चरण शुरु हो चुका है। दूसरे चरण का नया गाजियाबाद आर ओबी से गोविन्दपुरम का भी निर्मित हो चुका है। पूरे प्रोजेक्ट पर ९ करोड़ प्राधिकरण खर्च कर रहा है। तीसरे ट्रैक पर विचार हो रहा है। यह एएलटी पलाई ओवर ब्रिज से हापुड़ चुंगी तक का है।
साईकिल ट्रैक पर आम जन यानि की दुपहिया साईकिल चालकों से जब बात की तो वह इस ट्रैक व्यवस्था से खुश नही थे। इनका कहना था कि हमे ट्रैक की उपलब्धता तो तब भी नही होगी। इन ट्रैकों पर अपेक्षा अनुरुप साईकिलिंग किया जाना संभव होगा इसमें संशय है। सड़कों के किनारे व अन्य पगडंडियों पर जिस तरह चलना दुष्कर है बड़े वाहनों के खड़े रहने या चलने के प्रयास अथवा इन पर अतिक्रमण कर कारोबार होते है उसे देखकर नही लगता की यह ट्रैक जिस लक्ष्य को लेकर बन रहे है। उनसे जनता को सुविधा मिलेगी। यह जरुर है कि प्रदेश की सरकार जिसका चुनाव चिन्ह ही साईकिल है अथवा लाभ की अपेक्षा करती हो।
साईकिल निर्माता जिन्होने अब साईकिल बनाना बंद कर दिया था या बंद करने में लगे थी वापस चेहरे पर मुस्कान ला बैठे। साईकिल मरम्मत के लगे लोग भी पुनरू इस कार्य में रुचि लेने लगे है। 
साईकिल ट्रैक प्रतीकात्मक न बने रहे
वरिष्ठ नागरिक कल्यान समिति अध्यक्ष ईआरएस गुप्ता का कहना था कि जिस शो शराबे के तहद बड़े शहरों में इक्का दुक्का साईकिल ट्रैक बन रहे है या बनाने का प्रस्ताव है इससे लोगो का स्वास्थ्य नही सुधरने वाला है। इस तरह यह प्रतीकात्मक रह जायेगे। जरुरत है सड़कों के किनारे दो और जो पटरी छोडी जाती है उसे साईकिल ट्रैक संरक्षित कर उस पर अतिक्रमण रोक कर इसके दुरुपयोग का रोका जाएं। 
साईकिल ट्रैंक तो हो गया पदैल चलने की राह भी तो
साईकिल ट्रैक पर उ0प्र0 सरकार द्वारा जिस तरह की कर्मठता का प्रदर्शन दिखाया जा रहा है। इसके बाद पैदल चलने वालों जिनमें वरिष्ठ नागरिक व महिला और बच्चों ने जिज्ञासा जाहिर की है की पैदल सड़क किनारे चलना या फिर साईकिल ट्रैक की तरह स्वास्थय बनाने हेतु घुमने की राह के लिए भी इस तरह प्रदेश सरकार सोचेगी और उपलब्ध करायेगी। आज सड़कों व अन्य रास्तों पर पदैल चलने वालों के साथ भी साईकिल चालकों से कम दुघर्टना नही होती है।
        -अतिथि सम्पादक निष्ठा अग्रवाल

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