जन जन का विकास

प्रगति और विकास के लिए महंगाई आवश्यक एवं लाभप्रद है मंहगाई के कारण से ही आज आमजन की क्रय शक्ति बढ़ी है, जो वस्तुए दुर्लभ थी सहज सुलभ है मंहगाई अवरोध है कष्टदायी है इस मिथ्या भ्रम की स्थिति को समाप्त करे। मंहगाई के कारण ही हम प्रगति और विकास की ओर अग्रसर हो रहे है कृपया इसके समर्थन में अपने विचार बतायें एवं अपनी फोटो परिचय के साथ भेजें।

Tuesday, 5 May 2015

अमलतास

अमलतास के फूल झर गये धीरे से
कल तक जिसने प्यार किया
जब रूठे तो  मनुहार किया
आज वही अलि वादा अपना भूल गये
प्यार का प्रतिदान ऐसा भी है क्या
प्यास से जलते अधर दो मिल गये
माधुरी पीकर कहीं को उड़ चले
शेष  केवल रह गयी बेबस सी चाह
काँपती जाती  डगर है दूर तक
कल थे जो अपने वह न हैं यहाँ
साथ देने से भी उसको क्या मिला
हैं कहाँ वह और मंजिल है कहाँ
ठहर कर के दो पलों को सो लिया
बैठ कर छाया  में आँखें मूंदकर
स्वप्न में डूबा पथिक फिर चल पड़ा
अब किसी अनजान मंजिल के लिये
जिन पर था विश्वास उन्होंने कुचल दिया
रुँधे गले से दूब कह रही धीरे से
मीत खो गये गीत सो गये
अमलतास के फूल झर गये धीरे से

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