रीनाइटिस या हे फीवर पराग या धूल की शरीर पर परने वाली नकारात्मक प्रक्रिया का ही परिणाम है। यह नसिका मार्ग की रेखा के अंदर संवेदनशील बलगम की झिल्ली द्वारा होने वाली प्रतिक्रिया के कारण बनता है। स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली की कारण ही हम हवा में फैले अनेकों कणों और अशुद्धियों को रोकने में सक्षम रहते हैं जो हमारी सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाल कमजोर है तो संक्रमण के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके कारण सिरदर्द, आंखों और गले में जलन, नाक से पानी बहने और छींकने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। आयुर्वेद में, एलर्जी के उपचार के दौरान नाक के जरिये शोधन (सफाई) किया जाता है, जिसमें औषधीय तेल की बूंद को नाक में डाला जाता है। इसमें तेल साइनस की गुहा में प्रवेश करता हे जिससे बलगम की झिल्ली को चिकनी होने में मदद मिलती है। अगर नाश्या चिकित्सा सही तरीके से प्रभावी हुई तो साइनस संबंधी विषाक्त पदार्थों को दूर करने में मदद मिलती है।
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