ज्ञान केवल गुरु से ही मिल सकता है।
शास्त्र पढ़ लेने से या ज्ञान के शब्द सीख लेने से इंसान विद्वान तो हो
सकता है, ज्ञानी नहीं। ज्ञान के शब्द ज्ञान नहीं, वह तो शब्दों का जंगल
हैं। ज्यादातर लोग ज्ञान के शब्दों के जंगल में ही उलझे रहते हैं। इसलिए
यदि ज्ञान चाहिए तो ऐसे गुरु की शरण लो, जो तत्वदर्शी हों, जिन्होंने
आत्मज्ञान को अनुभव किया हो। ऐसा ज्ञानी गुरु तुमको तत्व ज्ञान का उपदेश
देंगे।
बिना सत्संग के ज्ञान नहीं
मिलता। जब गुरु के पास जाओ तो उनको दंडवत प्रणाम करो, अर्थात उनके सामने
अपने अहंकार का त्याग कर दो क्योंकि गुरु के सामने अहंकार के साथ बैठोगे तो
ज्ञान नहीं मिलेगा।
उसके बाद गुरु के सामने सरलतापूर्वक
अपने उन प्रश्नों को रखो जिस कारण तुम्हें अध्यात्म पथ पर मुश्किल आ रही
है। जब गुरु को इस बात का अहसास हो जाएगा कि अध्यात्म को लेकर तुम्हारी
जिज्ञासा वाजिब है, तब गुरु उन जिज्ञासाओं को खत्म कर देंगे। तब गुरु के
जवाबों में मिली सीख पर अमल करना शुरू कर दो क्योंकि गुरु वचनों पर चलना ही
गुरु की सच्ची सेवा है।
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